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परमेश्‍वर त्रिएक है

Sunday, May 20, 2012

Category: Hindi, Theology


त्रिएकता का सिद्धान्‍त बाईबिल का एक अनोखी शिक्षा है। हालांकि “त्रिएकता” शब्‍द स्‍वयं बाईबिल में पाई नही जाती है, परन्‍तु यह शिक्षा स्‍पष्‍ट है। इस शिक्षा के कुछ मूल सच्‍चाइयां इस प्रकार से है:

1. परमेश्‍वर एक है और उसकी एकता त्रिएक है। दूसरे शब्‍दों में, पिता, पुत्र, और पवित्रात्‍मा तीन अलग अलग व्‍यक्तित्‍व तो है परन्‍तु तीन अलग अलग ईश्‍वर नही। परमेश्‍वर एक है।
2. परमेश्‍वरत्‍व का हर एक व्‍यक्ति परमेश्‍वर है। पिता परमेश्‍वर है, पुत्र परमेश्‍वर है, और पवित्रात्‍मा परमेश्‍वर है। उनकी एकता आत्मिक है।
3. परमेश्‍वर की एकता और त्रिएकता विरोधात्‍मक नही है।
4. परमेश्‍वरत्‍व में व्‍यक्ति स्‍पष्‍ट है। पिता पुत्र नही, पुत्र पवित्रात्‍मा नही, और पवित्रात्‍मा पिता नही। परन्‍तु पिता परमेश्‍वर है, पुत्र परमेश्‍वर है, और पवित्रात्‍मा परमेश्‍वर है। वे एक है।
5. परमेश्‍वरत्‍व में कोई वयक्ति एक दूसरे से उंचा या नीचा नही है। उनका तत्‍व, अस्तित्‍व, एवं अनंतता एक है।
6. त्रिएकता एक ऐसा भेदपूर्ण सिद्धांत है जिसे हम पूरी रीति से समझ नही सकते है।

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